Home Folk कोयलड़ी | Twinkal Vaishnav | Lyrics

कोयलड़ी | Twinkal Vaishnav | Lyrics

ट्विंकल वैष्णव की आवाज में कोयलड़ी सॉन्ग बन्ना – बन्ना का राजस्थानी लोकगीत हैं। इस गीत का म्यूजिक सुनील दाधीच और गजेंद्र पंवार ने कंपोज किया व निर्देशक सज्जन सिंह गहलोत हैं। मारवाड़ी एल्बम का सॉन्ग पी.आर. जी म्यूजिक एंड फिल्म्स की ओर से प्रस्तुत हुआ हैं । एल्बम गीत के बोल पारम्परिक हैं।

प्रातकाल: उठकर कोयल कुकू मीठी बोल रही हैं और वन में मोर घूम घूम कर नाच रहा हैं। बन्नी अपने प्रिय बन्ना का इंतजार कर रही हैं और सूर्य उदय के साथ महल में पधारने के लिए विनती कर रही हैं। बन्ना सिर पर केसरिया साफा बांधे हुये नखरे वाली गौरी के पास जा रहे हैं और बन्नी को उसके बन्ना बड़े ही प्यारे व फुटेरे लग रहे हैं।

Koyaldi Song Lyrics

कोयलडी जी बोले कु कु मोरिया जी बोले
उगते प्रभाते बेगा आवो रे म्हारा लाल बन्ना थे
बेगा पधारो
कोयलडी जी बोले कु कु मोरिया जी बोले ….

केसरियो साफों बनसा फावे घणेरो
कोई तो नखराली नजर लगासी रे
म्हारा प्यारा बनसा बेगा पधारो
कोयलडी जी बोले कु कु मोरिया जी बोले ….

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पराया महला में बनसा मतना थे जाजो
एकलड़ा महला में बनसा मतना थे जाजो
कोई तो नखराली दिलडो लगासी रे म्हारा बन्ना बेगा पधारो
कोयलडी जी बोले कु कु मोरिया जी बोले ….

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